Wednesday, 25 March 2020

कानून की फिर उड़ी धज्जियां ...क्या हत्या के मामले को पुलिस ने किया गैर इरादतन हत्या में तब्दील ..?

    
                 मृतक प्रनिका 
               मेरी बेटी की हत्या हुई है, 
वह आत्महत्या नहीं कर सकती
अमरलाल बलेच्छा 

 उल्हासनगर - 22 मार्च के दिन देश के पीएम मोदी के कहने पर एक ओर जहां देश भर में जनता कर्फ्यू का माहौल बना हुआ था वहीं उसी दिन शाम होते-होते उल्हासनगर से एक सनसनीखेज खबर मिली कि उल्हासनगर कैंप-४ में एक औरत ने आत्महत्या कर ली है। पुलिस प्रशासन द्वारा पहले आत्महत्या का मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में जब मामला मीडिया में आया और तुल पकड़ा तो वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश के बाद जांच पड़ताल की गई। जाँच पड़ताल करने के बाद विठ्ठलवाडी पुलिस स्टेशन द्वारा आरोपी पति विनय चुग (29), मुकेशलाल चुग (56) व सास रेशमा मुकेश चुग (54) पर देर रात आईपीसी 304 (ब), 498 (अ), 34 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके बाद विवाहिता के पति विनय चुग को गिरफ्तार कर लिया, जो अब कोर्ट के आदेश पर पुलिस कस्टडी में है।  सास और ससुर अभी तक फरार बताए जा रहे हैं।       
प्रनिका चुग के पिता द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, कैम्प-3 के रहिवाशी अमरलाल वलेच्छा जिनकी फर्नीचर बाजार में रीजेंसी हाल के नीचे प्लायवुड की दुकान है, उन्होंने अपनी बड़ी बेटी अलका वलेच्छा (28) का विवाह 3 वर्ष पहले कैम्प-4 जानकी कुटीर निवासी मुकेशलाल चुग के बेटे विनय चुग से की थी। शुरुवात में सब कुछ ठीक था लेकिन जैसे-जैसे समय बीता वैसे-वैसे ससुराल में विवाद उपजने लगा। विठ्ठलवाड़ी पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, विवाह के एक महीने बाद जब अलका की छोटी बहन राखी उसे मायके लाने गई तभी सास रेशमा चुग ने उससे कहा कि मेरी बहु अलका को काम-धाम करने के लिए समझाओ। इस बात को राखी ने हल्के में लिया और बहन को लेकर कुछ दिनों के लिए मायके आ गई थी। एक सप्ताह मायके में रहने के बाद अलका वापस अपने ससुराल चली गई।
पिता अमरलाल वलेच्छा के अनुसार, पति विनय चुग (29) ,मुकेश लाल चुग (56) व सास रेशमा मुकेश चुग (54) आए दिन दहेज लाने के लिए उनकी बेटी अलका को मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना देते थे। 
मृतक प्रनिका अपने पिता अमरलाल बलेच्छा के साथ 
22 की सुबह 11 बजे जैसे ही पिता अमरलाल को बेटी अलका की सूचना मिली वैसे ही वह सपरिवार 10 मिनट में उसके ससुराल पहुंचे। बेडरूम के बेड पर जिंदगी और मौत से जूझती बेटी अलका को बचाने के लिए पिता अम रलाल वलेच्छा उसे तुरन्त समीप के निजी अस्पताल लेकर गए जहां डॉक्टरों ने सेंट्रल हॉस्पिटल भेज दिया। जांचोपरांत सरकारी सेंट्रल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने अलका को मृत घोषित कर दिया।
प्रनिका के पिता अमरलाल वलेच्छा और चाचा गुलाब वलेच्छा के अनुसार, प्रनिका के मौत की ख़बर मिलने के 10 मिनट में ही जब वो लोग (अलका) उर्फ प्रनिका के घर गये तो बेटी बिस्तर पर पड़ी हुई मिली। गले पर निशान थे। वो ना ही पंखे पर लटकी हुई थी और ना ही कमरे में खुदकुशी के कोई निशान थे।  बिस्तर से पंखे की दूरी भी मात्र 5.5 फीट थी तो 5 फ़ीट की प्रनिका पंखे से कैसे लटक सकती है और पंखा टेढ़ा भी क्यों नहीं हुआ ?
ऐसा तर्क प्रनिका के पिता और चाचा द्वारा दिया गया। अगर ये आत्महत्या है और सास-ससुर निर्दोष हैं तो वो फरार क्यों हैं ? आगे उन्होंने ये भी कहा कि, इस मामले को दबाने का भरपूर प्रयास ईगल कंपनी के लोगों ने किया था। पुलिस के कुछ अधिकारी राजनीतिक दबाव और कुछ पुलिस के दलाल के कहने पर मामले को दबाने के लिए एक पुलिस ऑफिसर ने पहले सिर्फ एडीआर दर्ज कर दिया था। बाद में लड़की के मायके वालों ने कुछ मीडियाकर्मियों से संपर्क किया तो मामला तुल पकड़ने लगा और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। लिहाजा पुलिस की किरकिरी होने और डीसीपी प्रमोद शेवाले तक बात पहुँचने पर उनके आदेश के बाद विट्ठलवाड़ी पुलिस ने मामला दर्ज किया है।

मृतक अलका चुग के पिता अमर वलेच्छा व चाचा गुलाब वलेच्छा ने चुग परिवार पर आरोप लगाते हुए ये कहा कि, हमारी बेटी को हमने पालपोस कर बड़ा किया है। हम सभी और उसके मित्र परिवार भी ये नहीं मानते कि प्रनिका जैसी लड़की आत्महत्या कर सकती है, उसकी हत्त्या हुई है, इसलिये सभी चुग परिवार वाले दोषियों को गिरफ्तार कर सज़ा दी जाए, हमारी बेटी के साथ इंसाफ हो और उसे न्याय मिले।

अब देखना है कि पुलिस क्या सच में प्रनिका को इंसाफ दिला पाएगी या दूसरे मामलों की तरह एक दलाल से याराना निभाने के लिए विट्ठलवाड़ी पुलिस इस मामले को भी यहां-वहां घुमा देगी ?
क्योंकि मामला इतनी देर बाद दर्ज करना और सास-ससुर दोनों के काफी समय तक पुलिस स्टेशन में मौजूद होने के बाद भी उनको गिरफ्तार न करना, दूसरे मामलों की तरह एक आरोपी को पहले गिरफ्तार करना और फिर दूसरे आरोपियों को बेल लेने की छूट दे देना, यह दिखाता है पुलिस कितना इंसाफ दिला सकती है।

फिलहाल अब ये मामला एक ईमानदार पुलिस अधिकारी एपीआई राजपूत को दिया गया है। ये अधिकारी पहले भी कई बड़े-बड़े मामले सुलझाने में अपना नाम कमा चुके हैं। अब यह मामला राजपूत के पास होने से कई समाजसेवक और मृतक के परिवारवालों की न्याय की आस नजर आ रही है।

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