Tuesday, 26 March 2019

पुलिस की हैवानियत

व्यापारी को अगवा कर लूटमार व पीट पीट कर झूठे केस में फंसाया  

उल्हासनगर : वर्दीवालों की गुंडागर्दी के कई मामले सुनने में बहुत आते रहते है| जिसमें वर्दीवाले अपनी वर्दी के घमंड में कई तरह के मामलों को अंजाम देते है कि सुनते ही रुह कांप जाए| हाल ही में एक ऐसा मामला देखने को मिला है, जहां एक व्यापारी को एक होटल से जबरन उठाकर उसको अगवा कर, लूटपाट कर वहशियाना तरीके से पीट-पीट कर उनके जेब से २५ हजार रुपए, एक सोने की अंगूठी जिसकी कीमत २० हजार रुपए है वो लूटकर मार-मारकर उपर से अवैध हथियार रखने का झूठा मामला दर्ज किया है, साथ ही व्यापारी की मॉं जब विरोध करने लगी तो उसको भी पीटा गया और साथ ही ५० हज़ार रुपए वसूले|पेशे से व्यापारी हितेश असरानी की उल्हासनगर-२ नेहरू चौक स्थित नास्ते की रमेश कोल्ड्रींक्स नामक मशहूर होटल है | यह व्यापारी २१ मार्च श्रीराम चौक स्थित ९० डिग्री होटल में बैठा था| तो उसी वक्त रात १.४५ बजेे ६ लोगों ने अचानक आकर हितेश को बाहर चलने के लिए बोले, उसके बाद जब हितेश ने लोगों के साथ जाने का विरोध किया तो जबरन ६ लोगों ने हितेश को होटल के नीचे रूकी पुलिस जीप में बिठाने लगे तब उसे मालूम पड़ा कि ये लोग पुलिस वाले है| हितेश ने बताया कि उनसे मैने यहां जबरदस्ती उठाकर लाने का मकसद पूछा तो मुझसे मारपीट करने लगे और मुझे चाकू और दुसरे गैरकानूनी हथियार होने की सूचना मिली बताकर मारने लगे और अपनी जेब से एक चाकू निकालकर मेरे हाथ में देकर मोबाईल से तस्वीर निकालने को बोलने लगे| जब मैने मना किया तो मुझे लाठी-डंडों और पट्टो से पीटने लगे और मैने फिर भी गुनाह कबूल नहीं की तो मुझे अलग-अलग झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर मुझे डराने लगे, इसी बीच मेरे मम्मी- पापा को मेरे ड्राईवर ने फोन कर के श्री राम चौक पर बुलाया जहां मेेरे मां-बाप के सामने ही मुझे पीटने लगे| मेरी मां से अवैध रुप से २ लाख रुपए की डिमांड करने लगे| मेरी मां ने जब पैसे नहीं दिए तो उनके सामने ही मुझे मारने लगे, जिसे वह देख नहीं पाई और मुझे उनसे छुड़ाने लगी तो मेरी मॉं को भी दो पुलिसवालो ने डंडे से मारा और मुझे जीप में डालकर विट्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन ले आए्|
उसी वक्त पुलिस स्टेशन में मेरी मां ने उस आदमी को ५० हजार रुपए दिए, २५ हजार मेरी जेब से भी निकालेे और साथ ही एक अंगूठे का छल्ला २० हजार रुपए का भी निकाला| साथ ही मेरे गले और अंगुली में से ६ अंगूठी और सोने की चैन मुझे निकालकर मेरे मां को देने को बोला और मैने निकाल के दिया| मगर उसके बाद भी मेरे उपर झूठा मामला दर्ज कर दिया| मेरी मां ने जब विरोध कर बोला की मैने ५० हजार रुपए दिए|

मेरे बेटे के २५ हजार कैश और एक २० हजार की अंगूठी देकर ९५ हजार रुपए हो गए वो भी हमने बेगुनाह बेटे को बचाने के लिए दिया तो एक अधिकारी ने मेरे मां को डराकर बोला चुपचाप बैठ जा उधर जाके वरना तेरे बेटे के उपर २-३ ऐसे गुनाह दाखील कर देंगे कि १-२ साल जेल से बाहर न आ पाएगा| हमने २ लाख मांगे तो नहीं दिए बोलती हो इतने पैसे नहीं है| जब तुम्हारा बेटा रोज २५-५० हजार रुपए होटलों में उड़ाता है हमको सब जानकारी है| चुपचाप बैठ जा वरना तेरे पति को भी झूठे मामले में फंसा देंगे|
पुलिस ने सुबह ५.३०- ५.४० बजे मुझे अस्पताल ले जाकर चेकअप कराया तो वहां मुझे उसी अधिकारी ने कहा कि डॉक्टर के सामने चुपचाप बैठना कुछ बोलना मत वरना फिर से तुझे मारेंगे मै डॉक्टर के सामने चुपचाप बैठा रहा| दूसरे दिन मुझे चोपड़ा कोर्ट जज के सामने हाजिर किया गया और फिर मुझे धमकी दी गई कि जज के सामने चुपचाप रहना वरना तेरी रिमांड लेकर तेरा हाथ-पैर फिर से तोड़ेंगेे और साथ ही दुसरा केस भी कर देंगे| पुलिस की पूरी रात मार से मैं डर गया और चुप रहा| फिर मुझे झूठे मामले में जमानत मिल गई उसके बाद २ दिन में अपने घर पर दवा-दारु करवाकर जब चलने फिरने लायक हुआ तो उठकर पुलिसकर्मी की शिकायत करने पुलिस स्टेशन गया तो वहां वरिष्ठ अधिकारी बंदोबस्त में व्यस्त हैं, ऐेसा कहकर मुझे भगा दिया गया|
मामला चाहे जो भी हो एक व्यापारी हो या एक आरोपी हो पुलिस को यह हक किसने दिया कि एक इंसान को इतने वहशियाने तरीके से अगवाह कर बिना सबूत झूठा मामला दर्ज कर पैसे और सोने को लूटना साथ ही डराकर ५० हजार रुपए लेना फिर झूठा मामला दर्ज करना, यह वहशीपन करने का हक इनको कौन देता है| पुलिस का काम आम शहरी को चोर- उच्चको लूटेरों से बचाना है, ना कि खुद मारपीटकर लूटना| क्या वरिष्ठ अधिकारी इस व्यापारी को इंसाफ दिला पाएंगे? क्या इससे लूटे पैसे वापस दिला पाएंगे? क्या व्यापारी के उपर दर्ज झूठे मामलों को जो फिल्मी अंदाज में फिल्माकर झूठ को सच बताकर दर्ज किया, उसकी उच्चस्तरीय जांच कर इंसाफ दिलाकर दोषी वर्दीवाले गुंडों पर सख्त कार्रवाई कर पाएंगे?
क्या यह ही कानून है जिसका दम मोदी सरकार भरती है कि महिला का आदर होना चाहिए्| सुरक्षित वातावरण होना चाहिए्| क्या यह वातावरण है जो हमारे देश की प्रधान सेवक अपने भाषणों में देते है ? पीड़ित महिला ने हिंदमाता को बताया कि अगर मुझे वरिष्ठ अधिकारियों से इंसाफ न मिला तो मैं हाई कोर्ट के समक्ष इंसाफ की गुहार लगाउंगी|

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