Sunday, 16 December 2018

मोदी का 'महा' दौरा क्यों ?


मेट्रो भूमिपूजन या देवेंद्र के खिलाफ विरोध की नब्ज को टटोलने की कोशिश ?
मुंबई/कल्याण : पिछले हफ्ते हुए ५ राज्यों के विधानसभाओं के परिणाम में सबसे खराब प्रदर्शन से भाजपा पार्टी अब हाशिए पर आती दिख रही है| मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में बुरी तरह हार के देखते हुए आसमान में उड़नेवाली पार्टी अब हर राज्यों में जा-जाकर आम मतदाताओं की नब्ज टटोलने का मन बना चुकी है| मध्य प्रदेश और राजस्थान में अपनी पार्टी के कई नेता अपने वरिष्ठ नेताओं, मंत्रियों व मुख्यमंत्रियों से नाराज थे,जसकी वजह से अंदरुनी खींचतान के चलते कहीं ५ साल पुरानी तो कहीं १५ साल पुरानी सत्ता गंवानी पड़ी और अंदरूनी खींचातानी के के चलते बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा| अब इसी हार को न दोहराने व अन्य राज्यों में मतदाताओं का मन टटोलने के लिए भाजपा हाई कमान कई राज्यों में कई वरिष्ठ मंत्रियों को भेज रही है|
यूपी और मध्य प्रदेश के बाद सबसे बड़ा राज्य राजनीति के हिसाब से महाराष्ट्र है| यहां पिछले साढ़े चार वर्षों से भाजपा की सरकार है| यहां पर शिवसेना की मदद से देवेंद्र फड़णवीस संघ के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री का पद संभाले हुए हैं| पिछले कई वर्षों से मुख्यमंत्री महाराष्ट्र के विकास को कम अपनी पार्टी के वरिष्ठों को काम पर लगाते ज्यादा देखे गए हैं| राजस्थान में महारानी के खिलाफ अंदरुनी नोंक-झोंक के चलते सत्ता से बेदखल होना पड़ा था| इसका डर अब हाई कमान को महाराष्ट्र में भी सता रहा है| एक ओर मराठाओं को आरक्षण देने से दलित और अन्य वर्ग नाराज दिख रहे हैं, तो कहीं पर किसानों के ऊपर रहे कर्ज का मुद्दा तो कहीं एक ओर मुंडे गुट तो दूसरी ओर गडकरी के चेले, एक ओर भुजबल जैसे नेता को जेल भेजने पर उनके समाज की नाराजगी तो दूसरी ओर अपने ही वरिष्ठ नेता खड़से की राजनीति पर लगाम लगाकर हाशिए पर डालने का मामला ही क्यों न हो, हर जगह देवेंद्र राजनीति करते दिखे| पिछले कई स्थानीय चुनाव हो या निकाय चुनाव हो, हर जगह पर देवेंद्र चुनाव में जीत दिलाकर भले ही इतने वर्षों से आला कमान को खुश रखे हुए थे| मगर कई प्रदेशों की हार की वजह से २०१९ में भी आलाकमान को हार का डर दिखने लगा है, क्योंकि २०१९ लोकसभा के साथ-साथ महाराष्ट्र में विधानसभा का भी चुनाव है|
ज्ञात हो कि २०१४ में मोदी लहर और स्वर्गीय गोपीनाथ मुंडे के नेतृत्व में भाजपा ने शिवसेना के साथ के चलते ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, मगर अब हालात कुछ और है| एक ओर सबसे बड़ा नेता पार्टी महाराष्ट्र में मुंडे के रुप में खो चुकी है, वहीं साथी दल सेना से सत्ता के नशे में भाजपा मुंह चिढ़ाते दिख रही है| यही वजह है कि मित्र दल खार खाए हुआ बैठा है| यही वजह है कि स्वयं पार्टी का जनादेश व अपने पार्टी के अंदर चल रहे घमासान को रोकने और देवेंद्र के कामकाज और पार्टी नेताओं व कार्यकर्ताओं का मन टटोलने के लिए और अंदरुनी विरोधाभास को देखने-समझने के लिए पंतप्रधान मोदी महाराष्ट्र के कल्याण शहर में मेट्रो के भुमिपूजन के लिए मंगलवार, १८ दिसंबर को आ रहे हैं| एक ओर मोदी के आने को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश दिख रहा है और देवेंद्र की टीम पीएम के स्वागत की तैयारी में जुट गई है, तो वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने यह कहकर भूचाल ला दिया कि पीएम के इस कार्यक्रम में सेना के नेताओं को दूर रखा जाए|
सूत्रों की माने तो मोदी यहां भाजपा की लहर देखकर २०१९ में सेना से गठबंधन करना चाहिए या नहीं करना चाहिए, इस संबंध में अपना मन बनाने आए हैं| भाजपा का महामंडल सेना को आमंत्रित न कर एक ओर देवेंद्र को अजमाना चाह रही है, तो वहीं दूसरी ओर यह कार्यक्रम शक्ति प्रदर्शन के रुप में अकेले निकालना चाहती है, क्योंकि आला नेताओं के मन में दुविधा है कि देवेंद्र का अंदर ही अंदर पार्टी विरोध व सेना से दूरी २०१९ में मोदी के सपने को पानी में न मिला दे| अगर सेना को दरकिनार किया जाता है तो महाराष्ट्र की राजनीति चाणक्य व राकांपा सुप्रिमो राजनीति में प्रबल हो जाएंगे और सेना कांग्रेस को लेकर भाजपा को गहरी हार दिलाने के अपने मन में पाले हुए मंसूबों में पास हो जाएंगे| इन्हीं कई वजहों से प्रधानमंत्री पहले से बने बनाए कार्यक्रम के बिना शक्ति प्रदर्शन दिखाने ठाणे जिले के कल्याण शहर में भूमिपूजन के लिए आने वाले हैं, क्योंकि ठाणे जिला शुरु से अपने बड़े क्षेत्रफल की वजह से और कई लोकसभा-विधानसभा सीटों के चलते राजनीतिक रुप से प्रमुख रहा है| यहां सेना और राकांपा का कई सीटों पर वर्चस्व है| भाजपा यहां अपना कद बढ़ाना चाहती है, तभी तो यहां खुद प्रधानमंत्री शक्ति प्रदर्शन दिखाने के लिए आ रहे हैं| यह शक्ति प्रदर्शन आनेवाले चुनाव में देवेेंद्र के भाग्य का फैसला बनकर उबरेगा या देवेंद्र के खिलाफ विरोधाभास को पीएम और बड़े नेता समझकर पार्टी के अंदर हो रहे वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा को समझकर दुरुस्त करेंगे या पार्टी का नेतृत्व देवेंद्र से लेकर किसी और के हाथ में दे देंगे?

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