Thursday, 12 October 2017

वैद्यकिय अधिकारी के कार्यालय में फर्जी डॉक्टर


उल्हासनगर: मंगलवार को मनपा आयुक्त निंबालकर ने वैद्यकिय अधिकारी राजा रिजवानी को दो दिन के अंदर फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ स्थानिय पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराने का आदेश दिया था| लेकिन दो दिन बित जाने के बाद भी वैद्यकिय अधिकारी रिजवानी ने अभी तक मामला नहीं दर्ज कराया| इसी बीच गुरुवार शाम को कानसई रोड के फर्जी डॉक्टर सुनिल पाटील को पत्रकारों ने वैद्यकिय अधिकारी के कार्यालय में देखा और उसका फोटो भी लिया| यह फर्जी डॉक्टर वैद्यकिय अधिकारी के पास क्यों आया था? इस विषय में अनेक प्रश्‍न निर्माण हुए है|
उल्हासनगर कैंप-१ के धोबीघाट परिसर में रहनेवाली सिमरन शर्मा का उपचार डॉक्टर प्रवेश शर्मा ने गलत ढंग से किया था| जिसके कारण २७ अगस्त को सिमरन की मौत हो गई थी| इसके बाद नगरसेवकों ने फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग मनपा आयुक्त राजेंद्र निंबालकर से की थी| १५ दिन पहले आयुक्त के आदेशा नुसार वैद्यकिय अधिकारी रिजवानी ने श्रीराम चौक स्थित डॉक्टर सुरेश डी., वी.टी.सी. ग्राऊंड परिसर के डॉक्टर एन.एस. जाधव, कानसई रोड परिसर के सुनिल पाटील और मौर्या नगरी रोड परिसर के अनिलकुमार निकालजे इन ४ डॉक्टरों के खिलाफ फौजदारी की कार्रवाई करने के लिए विठ्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन में अर्जी दी थी| लेकिन बयान दर्ज कराने के लिए वे विठ्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन में नहीं जा रहे थे| इस संदर्भ में मंगलवार को जब पत्रकारों ने आयुक्त निंबालकर को यह बात ध्यान दिलाई तब उन्होंने वैद्यकिय अधिकारी राजा रिजवानी को दोन दिनों के अंदर विठ्ठलवाड़ी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराने का आदेश दिया था| लेकिन गुरुवार शाम ६ बजे के लगभग फर्जी डॉक्टर सुनिल पाटील वैद्यकिय अधिकारी राजा रिजवानी के कार्यालय में बैठा हुआ था, जिसका फोटो पत्रकारों ने निकाला था| यह फोटो सोशल मिडीया पर वायरल होने के बाद मनपा आयुक्त राजेंद्र निंबालकर ने पत्रकारों को बताया कि फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कराया जाएगा|
सेटिंग के लिए नगरसेवक भी था हाजिर!
इस फोटो में स्थानिय पीआरपी पक्ष के नगरसेवक प्रमोद टाले भी दिख रहे है| प्रमोद टाले फर्जी डॉक्टर सुनिल पाटील के दवाखाना के बगल में रहते है| उनके आशिर्वाद से यह दवाखाना दो मंजिला बन गया है, ऐसी चर्चा मनपा में हो रही है| प्रमोद टाले वैद्यकिय अधिकारी राजा रिजवानी के पास पाटील के खिलाफ मामला न दर्ज हो इसके लिए वैद्यकिय अधिकारी को लक्ष्मी-दर्शन कराने आए थे क्या? ऐसी शंका व्यक्त की जा रही है

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