उल्हास नदी व वालधुनी नदी के प्रदूषण के लिए प्रदूषण नियंत्रण मंडल व नगरपालिका जिम्मेदार- सुप्रीम कोर्ट




उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली मनपा और अंबरनाथ, बदलापूर नपा  पर १०० करोड़ का आर्थिक दंड
उल्हासनगर: उल्हास नदी व वालधुनी नदी के प्रदूषण प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली, अंबरनाथ, बदलापूर नगर पालिका पर कुल मिलाकर १०० करोड़ रुपए आर्थिक दंड लगाया है| इसमें उल्हासनगर मनपा पर १५ करोड़ रुपए का जुर्माना तय हुआ है| इन नगरपालिकाओं के अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण मंडल को भी जिम्मेदार मानकर आगे की सुनवाई में अनुपस्थित रहने पर कठोर कार्रवाई करने की चेतावनी सुप्रीम कोर्ट ने दी है|
उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली, अंबरनाथ, बदलापूर नगर पालिका के हद में उल्हास व वालधूनी नदी स्थित है| कारखानों के जहरीले रसायन, जिन्स कारखानों के जहरीले रसायन, मलमूत्र और गंदा पानी इन नदियों में छोड़ा जाता है| इतना ही नहीं, दूसरे राज्यों से आनेवाले जहरीले रसायनों का टैकर भी वालधूनी नदी में छोड़ा जाता है| दरअसल प्रदुषीत पानी पर जलशुद्धीकरण प्रक्रिया करने के बाद ही पानी नदी छोड़ा जाए ऐसा आदेश शासन ने सभी संस्थाओं को दिया है| परंतु शासन के इस आदेश का हमेशा से उल्लंघन होता आया है| इस प्रकरण में वनशक्ती पब्लिक ट्रस्ट और ओ.आर.सी. नामक सामाजिक संस्था ने जल प्रदूषण के संदर्भ में सतर्कता दिखाते हुए प्रदूषण के जिम्मेदार उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली, अंबरनाथ, बदलापूर नगरपालिकाओं के विरुद्ध २०१३ में जनहित याचिका दायर की थी| इस प्रकरण में संबंधीत नगर पालिकाओं पर आर्थिक दंड लगाकर प्रदूषण रोकने का इंतजाम करने का आदेश दिया था| इसी दरम्यान नगर पालिका व संबंधित प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने जब इस संदर्भ में गंभीरतापूर्वक कोई निर्णय नहीं लिया तब याचिका कर्ताओं ने सुप्रिम कोर्ट ने इस मुद्दे पर दखल देने के लिए याचिका दायर की| सुनवाई के दौरान नगर पालिका व प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने कोई आपसी तालमेल न होने के कारण उल्हास व वालधूनी नदी मृतप्राय हो गई है, ऐसी फटकार सुप्रीम कोर्ट ने इन्हे लगाई है| आगे की सुनवाई १८ सितंबर को होना है, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने नगर पालिका व प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों को सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का आदेश दिया है| इस संदर्भ में जब उल्हासनगर मनपा के पाणीपुरवठा शहर अभियंता कलई सेलवन से पुछा गया तो उन्होंने मान्य किया की सुप्रीम कोर्ट से ऐसी नोटीस मिली है| इस संदर्भ में हम अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे, ऐसा उन्होंने बताया| इस प्रकरण में जब प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों से संपर्क साधा गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका|

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