नेवाली जमीन ७/१२ घोटाले का जवाबदार कौन ?


डोंबिवली (मिथिलेश गुप्ता )-सन १९४२ में हवाई अड्डे के लिये गये जमीन के लिस्ट के बारे में अब शंका व्यक्त की जा रही है, इसमें २०० जमीन के ७/१२ का अभी के नेवी विभाग के सूचि में उल्लेख नहीं है| ये सभी ७/१२ अधिकांश अंबरनाथ तालुका के हैं, जिस जमीन पर नेवी का उल्लेख है| उस समय जब दो सौ ७/१२ किसानों के नाम हो सकते है तो बाकी के क्यों नहीं हुए ? ऐसा सवाल अब उपस्थित किया जा रहा है| ऐसे जमीन में से अधिकतर जगह पर इस समय अनधिकृत फार्महाऊस , बंगले, दुकान व लगभग सात सौ रूम की चॉल का बांधकाम शुुरु है| इसलिए यहां के किसानों को खेती करने के लिये बहुत कम जमीन बची है| इन सभी ७/१२ घोटाला का जवाबदार कौन है ? ऐसा सवाल ग्रामस्थ को सता रहा है|भारत कृषिप्रधान देश है, मात्र सरकार किसी की भी हो आज तक किसानों पर हो रहे अन्याय नहीं रुके| जिस तरह अंबरनाथ के पिसवली में ४१, वसार में ८८,आडिवली-ढोकली में १, तासगांव में २, नांदिवली में १३ ऐसे ७/१२ का नेवी की सूचि  में उल्लेख नही है| उसी तरह संपूर्ण यादी के सभी ७/१२ नेवी से मुक्त करके कष्ट कर रहे किसानों के नाम पर हो ऐसी जोरदार मांग स्थानिकों की तरफ से हो रहा है|आज संरक्षण राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने बैठक बुलाई थी, इस बैठक मे इस पर चर्चा होने संभावना है| बीते सप्ताह नेवाली परिसर में किसानों ने हिंसक आंदोलन किया था, जिससे संपूर्ण भारत में इस आंदोलन की चर्चा हुई| हमारे जमीन पर खेती करने के लिये नेवी ने अचानक प्रतिबंध लगाया| हमे खेती करने दो , इस मांग के लिए परिसर के १७ गांव के ग्रामस्थ व बड़ी संख्या में महिलावर्ग रास्ते पर उतरकर आंदोलन कर रही हैं|सरकार का कहना है कि , हवाई अड्डे के लिए पहले भाड़ेतत्व पर व बाद में किसानों से भूसंपादन करके जमीन लिया गया था| परंतु जमीन का मोबदला मात्र सरकार ने एक ही बार देने का पंजीकृत जाहीर किया है , और यही दिखाई दे रहा है| तत्कालीन भाव के अनुसार लगभग १६७० एकड़ जमीन के लिये सिर्फ ४ लाख ७८ हजार १०७ रुपये, कितने जमीन मालिकों को कितना दिया गया इसकी पूरी जानकारी सूची में लिखी है| इसलिए अगर भाड़े पर दिया होगा तो अब जमीन तत्कालीन जमीनमालिक के वारिस की है ऐसा स्पष्ट होता है| जिन ७/१२ पर नेवी का नाम मिला, उस ७/१२ में बीते ५० सालों में लगभग १४०० फेरबदल हुआ है| इस बारे में नेवी के अधिकारियों के दिये उत्तर में उल्लेख नही होता ,इससे ग्रामस्थ में शंका पैदा हुई है| ये जमीन पहले कुछ शाहूकारों की थी , दूसरे महायुद्ध में  ब्रिटिश ने नेवाली में जगह भाड़े पर ली थी. स्वतंत्रता के बाद जमीन आर्मी विभाग ने भूसंपादन किया| कुछ समय बाद ये जमीन नेवी के पास सौंप दिया ऐसा खुलासा संरक्षण विभाग के आधिकारी कर रहे हैं| इस भाग में दिन ब दिन अवैध बांधकाम में ंंरहने आए लोगों ने अपने जीवन भर की कमाई देकर घर खरीदा है

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