Thursday, 4 May 2017

चुनाव आयोग ने 12 मई को बुलाई सर्वदलीय बैठक, EVM मामला


नई दिल्ली: ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) से कथित छेड़छाड़ के मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग ने 12 मई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में सभी राजनीतिक पार्टियां शामिल होंगी जिसमें चुनाव आयोग ईवीएम को लेकर अपना पक्ष प्रस्तुत करेगा. गौर हो कि चंद महीने पहले संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम सिस्टम के लेकर संदेह जताया है और उसकी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं. लेकिन चुनाव आयोग साफ कर चुका है कि ईवीएम से छेड़छाड़ संभव नहीं है. चुनाव आयोग स्पष्ट कर चुका है कि ईवीएम से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. 
चुनाव आयोग इलेक्ट्रिानिक वोटिंग मशीन  की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के मुद्दे को लेकर सभी राजनीतिक दलों के साथ 12 मई को बैठक कर सकता है. देश के 16 विपक्षी दलों ने इस संबंध में सवाल खड़े किए हैं. सूत्रों ने बताया कि आयोग का कहना है कि इस बैठक में वह सभी दलों को यह समझाने की कोशिश करेगा कि ईवीएम पूरी तरह विश्वसनीय है और इसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती . चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने 29 अप्रैल को चंडीगढ़ में संवाददाताओं से कहा था, ‘हम जल्द ही सभी दलों के साथ एक बैठक करेंगे, जिसमें दलों को बताया जाएगा कि हमारी प्रशासनिक और तकनीकी सुरक्षा प्रणाली के चलते ईवीएम छेड़छाड़ रोधी और सुरक्षित है. 
इस बैठक के लिए सात राष्ट्रीय दलों और 49 राज्यस्तरीय दलों को बुलाया जाएगा.

विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम सिस्टम को लेकर जताया है संदेह
हाल ही में 16 विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से मतदान पत्र (बैलेट पेपर) व्यवस्था की ओर लौटने का अनुरोध करते हुए दावा किया था कि ईवीएम में लोगों का विश्वास खत्म हो गया है. गौरतलब है कि वीवीपीएटी से एक पर्ची निकलती है जिसे देख कर मतदाता यह सत्यापित करता है कि ईवीएम में उसका वोट उसी उम्मीदवार को गया है जिसके नाम के आगे का उसने बटन दबाया है. समझा जाता है कि चुनाव आयोग एक खुली चुनौती देकर किसी से भी यह कहने वाला है कि वह ईवीएम के दुरूपयोग के संदेह को दूर करने के लिए उसे हैक करने की कोशिश कर सकते हैं. चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि आयोग ने चुनाव में उपयोग के लिए वीवीपीएटी मशीनों की आपूर्ति के लिए आदेश दिया है.
दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने ईवीएम को लेकर खड़े किए हैं सवाल
इस साल पांच राज्यों - उत्तर प्रदेश, उत्तारखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में हुए विधानसभा चुनाव में कई राजनीतिक दलों ने ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए इसके स्थान पर मतपत्र का इस्तेमाल करने की हिमायत की थी. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईवीएम के दुरूपयोग का आरोप लगाने वालों में प्रमुख रूप से शामिल हैं जबकि बसपा नेता मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस मशीन के बारे में सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस और बसपा सहित कई पार्टियों ने इसपर सवाल उठाए थे. 

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