आगरा में पहली बार माइक्रो ATM से बंटी सैलरी, 1200 वर्कर्स को हुआ पेमेंट

आगरा. नोटबंदी के बाद पहली बार आगरा में गुरुवार को जूता फैक्ट्री के वर्कर्स को माइक्रो एटीएम से सैलरी बांटी गई। सैलरी में नए नोटों को पाकर करीब 1200 वर्कर्स खुश हुए। वहीं, फैक्‍ट्री मालि‍क ने भी चैन की सांस ली। क्‍या है पूरा मामला...
- नोटबंदी के बाद लोगों को सैलरी लेने-देने की समस्‍या की आशंका थी। इससे आगरा के जूता वर्कर्स और उनके फैक्‍ट्री मालि‍क भी परेशान थे।
- ओम एक्सपोर्ट के मालिक रवि सहगल ने बताया कि‍ हमें सप्ताह में एक बार कारीगरों को सैलरी देनी होती है।
- नोटबंदी के बाद समस्‍या होने पर हमने पहले बिग बाजार और बेस्ट प्राइस से 1-1 हजार रुपए के कूपन मंगवाए।
- वह कूपन कारीगरों को दिए गए, लेकि‍न वहां ब्रांडेड प्रोडक्ट ही मिलने के कारण कारीगरों को महंगा लगा।
- साथ ही पूरे 1 हजार रुपए का सामान खरीदने की कंडीशन भी थी।
- उन्‍होंने कहा, 'फिर हमने फैक्ट्री में ही एक परचून की दुकान शुरू की। यहां भी एक किलो के पैकेट में सामान उपलब्‍ध होने के कारण समस्‍याएं थीं।
- इसी दौरान बैंक ऑफ इंडिया के स्टाफ से बात हुई। उन्‍होंने ही माइक्रो एटीएम से सैलरी देने का रास्‍ता सुझाया।

क्या है माइक्रो एटीएम
- बैंक ऑफ इंडिया ने सैलरी पेमेंट के लिए माइक्रो एटीएम की सुविधा शुरू की है।
- यह बिल्‍कुल स्वाइप मशीन की तरह है। यह लैपटॉप से अटैच होकर काम करती है।
- सैलरी बांटने के लिए पहले बैंक में पैसे जमा करना होता है।
- इसके बाद बैंक निर्धारित लिस्ट के लोगों के खाते में पैसा भेज देता है।
- निर्धारित समय पर बैंककर्मी माइक्रो एटीएम लेकर आते हैं। वहां कर्मचारी मशीन में अपना एटीएम स्‍वाइप कर अंगूठे का निशान मशीन पर देता है। इसके बाद बैंककर्मी उसे पैसे दे देते हैं।

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