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Monday, 29 November 2021

मुंबई की अदालत ने नवाब मलिक को मानहानि के एक मामले में जमानत दी

मुंबई की अदालत ने नवाब मलिक को मानहानि के एक मामले में जमानत दी

 मुंबई: मुंबई की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने सोमवार को महाराष्ट्र के मंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता नवाब मलिक को मानहानि के एक मामले जमानत दे दी।

मानहानि का यह मामला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की युवा शाखा की मुंबई इकाई के पूर्व प्रमुख मोहित कम्बोज भारतीय ने दायर किया है।

मझगांव मजिस्ट्रेट अदालत ने 15,000 रुपये के निजी मुचलके पर मलिक को जमानत दी।

अदालत ने इस महीने की शुरूआत में भारतीय की आपराधिक मानहानि शिकायत पर मलिक को नोटिस जारी किया था। भारतीय ने आरोप लगाया है कि राकांपा नेता ने पिछले महीने एक क्रूज जहाज पर स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) की छापेमारी के बाद उनकी और उनके एक करीबी रिश्तेदार की मानहानि की।

मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराई गई अपनी शिकायत में भारतीय ने दावा किया था कि मलिक ने एनसीबी के छापे और बॉलीवुड अभिनेता शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान सहित कई लोगों की गिरफ्तारी पर नौ अक्टूबर को संवाददाता सम्मेलन कर इरादतन उनका (भारतीय का) और उनके करीबी रिश्तेदार रिषभ सचदेव की मानहानि की थी।

उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 499 एवं 500 (मानहानि) के तहत कथित अपराध करने को लेकर मलिक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

अदालत इस मामले में अब 30 दिसंबर को आगे सुनवाई करेगी।


प्रियंका चतुर्वेदी समेत 12 सांसद पूरे सत्र के लिए राज्‍यसभा से निलंबित, पिछले सेशन में अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई

प्रियंका चतुर्वेदी समेत 12 सांसद पूरे सत्र के लिए राज्‍यसभा से निलंबित, पिछले सेशन में अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई

  • प्रियंका चतुर्वेदी समेत 12 सांसद पूरे सत्र के लिए राज्‍यसभा से निलंबित, पिछले सेशन में अनुशासनहीनता को लेकर कार्रवाई
संसद (फाइल फोटो)

राज्यसभा (Rajya Sabha) ने अपने शीतकालीन सत्र (Winter Session) के पहले दिन सांसदों पर बड़ी कार्रवाई की है. सदन ने सोमवार को शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) और तृणमूल सांसद डोला सेन (Dola Sen) सहित अपने 12 सदस्यों को मौजूदा सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित कर दिया है. इनके खिलाफ मानसून सत्र में (11 अगस्त को) अनुशासनहीनता फैलाने के आरोप में कार्रवाई की गई है.

प्रियंका चतुर्वेदी और डोना सेन के अलावा सोमवार को निलंबित किए गए सांसदों में एलाराम करीम (सीपीएम), कांग्रेस की फूलो देवी नेताम, छाया वर्मा, आर बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रसाद सिंह, CPI के बिनॉय विश्वम, टीएमसी के शांता छेत्री और शिवसेना के अनिल देसाई शामिल हैं. निलंबन नोटिस में कहा गया है कि सांसदों ने 11 अगस्त को मानसून सत्र के आखिरी दिन अपने हिंसक व्यवहार से और सुरक्षाकर्मियों पर जानबूझकर किए गए हमलों से सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है.

राज्यसभा के फैसले से नाराज शिवसेना सांसद 

राज्यसभा द्वारा की गई कार्रवाई पर शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, ‘अगर आप सीसीटीवी फुटेज देखें तो यह रिकॉर्डेड है कि कैसे पुरुष मार्शलों ने महिला सांसदों के साथ धक्का-मुक्की की थी. एक तरफ ये सब और दूसरी तरफ आपका फैसला? यह कैसा असंसदीय व्यवहार है?’ उन्होंने आगे कहा, ‘डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, वहां भी आरोपी की बात को सुना जाता है. उनके लिए वकील भी उपलब्ध कराए जाते हैं. कभी-कभी सरकारी अधिकारियों को उनका पक्ष लेने के लिए भेजा जाता है, मगर यहां हमारा पक्ष नहीं लिया गया.’


कृषि कानून वापसी बिल दोनों सदनों में पास, लोकसभा कल सुबह 11 बजे तक स्थगित; किसान आंदोलन जारी रहेगा

कृषि कानून वापसी बिल दोनों सदनों में पास, लोकसभा कल सुबह 11 बजे तक स्थगित; किसान आंदोलन जारी रहेगा

 संसद के विंटर सेशन के पहले दिन ही कृषि कानून वापसी बिल दोनों सदनों में पास हो गया है। यह बिल अब राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया। इसके तुरंत बाद ही विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष के हंगामे के बीच ही बिल राज्यसभा में पास हुआ। वहीं, लोकसभा कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

लोकसभा में विंटर सेशन शुरू होते ही कृषि मंत्री तोमर ने कृषि कानून वापसी का बिल पेश किया, जो पास भी हो गया। इसके बाद कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने कानून वापसी पर चर्चा की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला ने विपक्ष से कहा कि आप चर्चा चाहते हैं तो हम वो करवाने को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष ने नारेबाजी जारी रखी।

राहुल बोले- कहा था कि काले कानून वापस लेने पड़ेंगे
कांग्रेस के राहुल गांधी ने कहा, "हमने कहा था कि 3 काले कानूनों का वापस लेना पड़ेगा। हमें पता था कि 3-4 बड़े पूंजीपतियों की शक्ति हिंदुस्तान के किसानों के सामने खड़ी नहीं हो सकती और वही हुआ। काले कानूनों को रद्द करना पड़ा। ये किसानों की सफलता है। देश की सफलता है।"

गलती मानी है तो नुकसान की भरपाई करें
राहुल ने कहा कि ये तीन कानून किसानों और मजदूरों पर आक्रमण थे। किसानों और मजदूरों की कठिनाइयों की लिस्ट लंबी है, जो MSP और कर्ज माफी तक ही सीमित नहीं है। वे अभी भी मांग कर रहे हैं और हम उनका समर्थन करते हैं। आपने कहा प्रधानमंत्री ने माफी मांगी, इसका मतलब प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि उनकी गलती के कारण 700 लोग मारे गए, उनकी गलती से आंदोलन हुआ। अगर उन्होंने गलती मानी है तो नुकसान की भरपाई तो करनी पड़ेगी।

कांग्रेस नेता ने कहा, "जिस तरह से संसद में बिना किसी चर्चा के कानून रद्द किए गए, ये दिखाता है कि सरकार चर्चा से डरती है। सरकार जानती है कि उसने गलत काम किया है। 700 किसानों की मृत्यु और कानूनों को लागू करने के पीछे किसकी शक्ति थी, इस पर चर्चा होनी थी, लेकिन सरकार ने नहीं होने दी।"

टिकैत ने कहा- हमारा आंदोलन जारी रहेगा
इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा के लीडर राकेश टिकैत ने कहा, "कृषि कानून वापस हो चुके हैं, लेकिन अब MSP और किसानों की समस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए। हम 4 दिसंबर को एक बैठक करेंगे और उसमें आंदोलन की दिशा तय की जाएगी। तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।"

मोदी ने सत्र से पहले की थी शांति बनाए रखने की अपील
संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक दलों से शांति और मर्यादा बनाए रखने की अपील की। PM ने कहा कि संसद में सवाल हो, लेकिन शांति भी बनी रहे। हमारी पहचान इस बात से हो कि हमने सदन में कितने घंटे काम किया, न कि इस बात से कि सदन में किसने कितना जोर लगाकर संसद को रोका। प्रधानमंत्री का इशारा विपक्ष के हंगामे की तरफ था।

इधर, कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर कांग्रेस ने संसद परिसर में धरना दिया। इसमें कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल समेत पार्टी नेता शामिल हुए।

कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस सांसद।
कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस सांसद।

कार्यवाही को लेकर मोदी के 4 संदेश
1. मोदी ने कहा, "हमने देखा कि पिछले दिनों संविधान दिवस भी नए संकल्प के साथ संविधान की आत्मा को चरितार्थ करने के लिए सभी के दायित्व के संबंध में पूरे देश ने संकल्प किया है। इन सबको देखते हुए हम चाहेंगे, देश भी चाहेगा, हर नागरिक चाहेगा कि ये संसद सत्र और आगे आने वाला सत्र आजादी के दीवानों की भावना और अमृत महोत्सव की भावना के लिहाज से संसद भी देश हित में चर्चा करे।"

2. प्रधानमंत्री ने कहा कि आशा करता हूं कि भविष्य में संसद को कैसा चलाया, कितना अच्छा योगदान किया इस तराजू पर तौला जाए। किसने कितना जोर लगाकर संसद को रोका, ये मानदंड नहीं होगा। ये मानदंड होगा कि संसद में कितने घंटे काम हुआ। सरकार हर मुद्दे पर चर्चा और सवाल का जवाब देने को तैयार है। संसद में सवाल भी हो और शांति भी हो।

3. "सरकार के खिलाफ, नीतियों के खिलाफ जितनी आवाज प्रखर होनी चाहिए वो हो, लेकिन संसद की गरिमा, स्पीकर की गरिमा, चेयर की गरिमा के विषय में हम वो आचरण करें, जो आने वाले दिनों में देश की युवा पीढ़ी के काम आए।"

4. उन्होंने कहा कि नए वैरिएंट की खबरें भी हमें और सतर्क, सजग करती हैं। मैं संसद के सभी साथियों को सतर्क रहने की प्रार्थना करता हूं। सत्र में देशहित के निर्णय तेजी से और मिलजुलकर करें।

संसद के शीतकालीन सत्र में सबकी निगाहें कृषि कानूनों की वापसी के बिल पर हैं। सरकार इसे सत्र के पहले दिन ही सदन में पेश करने जा रही है।
संसद के शीतकालीन सत्र में सबकी निगाहें कृषि कानूनों की वापसी के बिल पर हैं। सरकार इसे सत्र के पहले दिन ही सदन में पेश करने जा रही है।

सालभर से जारी कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन
तीनों कानून पिछले साल केंद्र सरकार ने पारित कराए थे, जिन्हें विपक्षी दलों से लेकर किसान संगठनों तक के अभूतपूर्व विरोध का सामना करना पड़ा। इन कानूनों की वापसी के लिए किसान संगठन पिछले एक साल से दिल्ली की सीमाओं को घेरे बैठे हैं। लगातार विरोध के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 नवंबर को इन कानूनों को वापस लेने की घोषणा की थी।

इस सत्र में 25 बिल और पेश करेगी सरकार
केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापसी बिल के अलावा 25 अन्य बिल भी 23 दिसंबर तक चलने वाले शीतकालीन संसदीय सत्र के दौरान पेश करने की तैयारी की हुई है, जिनमें सबसे अहम बिल प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी पर बैन लगाने से जुड़ा हुआ है। हालांकि सरकार खुद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को डिजिटल करेंसी उतारने की इजाजत दे रही है।

इसके अलावा शीतकालीन सत्र के दौरान पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019 पर संसद की जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट भी सदन में टेबल की जाएगी।


ओमिक्रॉन पर एक्शन में सरकार:'एट रिस्क' देशों के यात्रियों का एयरपोर्ट पर ही कोरोना टेस्ट, निगेटिव आने पर भी 7 दिन क्वारैंटाइन रहना होगा

ओमिक्रॉन पर एक्शन में सरकार:'एट रिस्क' देशों के यात्रियों का एयरपोर्ट पर ही कोरोना टेस्ट, निगेटिव आने पर भी 7 दिन क्वारैंटाइन रहना होगा

 भारत में पिछले 24 घंटे में 8,309 कोरोना केस सामने आए हैं। वहीं, इस दौरान कोरोना से 236 लोगों की जान भी गई है। इस बीच, वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खतरे के मद्देनजर भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सोमवार को नई गाइडलाइन जारी की है। नई गाइडलाइन के मुताबिक, 'एट रिस्क' देशों से आने वाले सभी यात्रियों को आने के साथ ही कोविड-19 टेस्ट से गुजरना होगा। टेस्टिंग की शर्त तब भी लागू होगी, जबकि आने वाले यात्री पूरी तरह वैक्सीनेटेड हों।

'एट रिस्क' वाले देशों को छोड़कर बाकी देशों के यात्रियों को एयरपोर्ट से बाहर जाने की अनुमति होगी। उन्हें 14 दिन के लिए सेल्फ मॉनीटिरिंग करनी होगी। ओमिक्रॉन के खतरे की श्रेणी से जिन देशों को बाहर रखा गया है, वहां से आने वाले यात्रियों में 5% की टेस्टिंग जरूर की जाएगी।

सरकार की ट्रैवल एडवाइजरी में ओमिक्रॉन को फैलने से रोकने के लिए हर संक्रमित यात्री के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग कराने का फैसला किया गया है।
सरकार की ट्रैवल एडवाइजरी में ओमिक्रॉन को फैलने से रोकने के लिए हर संक्रमित यात्री के सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग कराने का फैसला किया गया है।

गाइडलाइन्स की मुख्य बातें..

  • 'एट रिस्क' यानी खतरे की श्रेणी में रखे गए देशों से आने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट पर टेस्ट कराना होगा।
  • बाहर जाने वाले यात्रियों को 72 घंटे पहले किए गए टेस्ट की RT-PCR रिपोर्ट देना जरूरी होगा।
  • पॉजिटिव पाए जाने वाले यात्रियों को आइसोलेट किया जाएगा, सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग होगी।
  • निगेटिव पाए गए यात्री घर जा सकेंगे, पर 7 दिन तक आइसोलेट रहना होगा। ऐसे यात्रियों का 8वें दिन फिर टेस्ट होगा और अगले 7 दिन उन्हें सेल्फ मॉनीटिरिंग करनी होगी।
  • ओमिक्रॉन के खतरे की श्रेणी से जिन देशों को बाहर रखा गया है, वहां से आने वाले यात्रियों में 5 फीसदी की टेस्टिंग जरूर की जाएगी।
  • राज्य भी विदेशों से आने वाले यात्रियों की निगरानी करें, टेस्टिंग बढ़ाएं और कोरोना हॉटस्पॉट की भी निगरानी करें।

12 देशों को 'एट रिस्क' वाले देशों में रखा
बता दें कि केंद्र सरकार ने 12 देशों की लिस्ट तैयार की है, जहां नए वैरिएंट का खतरा अधिक है। इनमें यूके समेत यूरोप के सभी देश, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, बांग्लादेश, बोत्सवाना, चीन, मॉरीशस, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे, सिंगापुर, हांगकांग और इजराइल शामिल हैं।

राज्यों को निगरानी बढ़ाने को कहा
राज्यों को भी निगरानी बढ़ाने को कहानई गाइडलाइन में राज्यों से भी विदेशों से आने वाले यात्रियों की निगरानी और टेस्टिंग बढ़ाने के साथ ही कोरोना हॉटस्पॉट की भी निगरानी करने को कहा है।

बड़े शहरों में संक्रमण रोकने के लिए केंद्र ने राज्यों को खासतौर पर आगाह किया है, उन्हें टेस्टिंग बढ़ाने को कहा गया है।
बड़े शहरों में संक्रमण रोकने के लिए केंद्र ने राज्यों को खासतौर पर आगाह किया है, उन्हें टेस्टिंग बढ़ाने को कहा गया है।

'एट रिस्क' वाले देशों के यात्री जांच रिपोर्ट आने तक एयरपोर्ट पर ही रहेंगे
स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार 'एट रिस्क' यानी खतरे की श्रेणी में रखे गए देशों से आने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट पर टेस्ट कराना होगा। एयरपोर्ट पर ही रिजल्ट की प्रतीक्षा करनी होगी। यदि रिपोर्ट नेगेटिव है तो वे 7 दिनों के लिए होम क्वारंटाइन होंगे। 8वें दिन फिर टेस्ट होगा और यदि नेगेटिव हो तो अगले 7 दिनों के लिए खुद अपनी निगरानी करनी यानी सेल्फ मॉनीटिरिंग करनी होगी।


मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्‍नर IPS अधिकारी परमबीर सिंह को जल्‍द निलंबित कर सकती है राज्‍य सरकार!, देबाशीष चक्रवती समिति की रिपोर्ट बनेगी आधार

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्‍नर IPS अधिकारी परमबीर सिंह को जल्‍द निलंबित कर सकती है राज्‍य सरकार!, देबाशीष चक्रवती समिति की रिपोर्ट बनेगी आधार

 


  • मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्‍नर IPS अधिकारी परमबीर सिंह को जल्‍द निलंबित कर सकती है राज्‍य सरकार!, देबाशीष चक्रवती समिति की रिपोर्ट बनेगी आधार
मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह (फाइल फोटो).

मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्‍नर वरिष्‍ठ आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह (Param bir singh) पर जल्‍द ही निलंबन की तलवार लटक सकती है. राज्‍य सरकार ने महाराष्ट्र सरकार ने आईएएस अधिकारी देबाशीष चक्रवती समिति की रिपोर्ट(Debashish Chakravarty committee report) के आधारों को स्वीकार कर लिया है. राज्य सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र की उद्धव सरकार इस सप्ताह तक निलंबन की कार्रवाई शुरू कर सकती है.

जानकारी के अनुसार उक्त समिति ने आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह के निलंबन के लिए रिपोर्ट में कई आधारों का उल्लेख किया था. इस समिति का गठन राज्य सरकार द्वारा यह देखने के लिए किया गया था कि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी परमबीर सिंह के खिलाफ किस आधार पर निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है. बता दें कि परमबीर सिंह बीमारी की छुट्टी के बाद लापता हो गए थे और कई महीनों तक उनका पता नहीं चल पाया था.

अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रही समिति के सामने पेश हुए परमबीर सिंह

इससे पहले मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे आयोग के सामने सोमवार को पेश हुए. सिंह के उपस्थित होने के बाद, न्यायमूर्ति के यू चांदीवाल आयोग ने उनके खिलाफ जारी जमानती वारंट को रद्द कर दिया और उनसे मुख्यमंत्री राहत कोष में 15,000 रुपये जमा करने को कहा.

इस साल मार्च में एक सदस्यीय आयोग का गठन तत्कालीन गृह मंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पाार्टी (NCP) नेता देशमुख के खिलाफ सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए किया गया था.

ये है पूरा मामला

‘एंटीलिया’ बम कांड के बाद मार्च में मुंबई पुलिस आयुक्त के पद से स्थानांतरित कर दिए गए सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारियों से शहर के बार और रेस्तरां से एक महीने में 100 करोड़ रुपये की वसूली करने के लिए कहा था.

जबरन वसूली के एक मामले में यहां की एक अदालत द्वारा फरार घोषित सिंह छह महीने बाद पिछले गुरुवार को सार्वजनिक रूप से सामने आए और अपना बयान दर्ज कराने के लिए मुंबई अपराध शाखा के समक्ष पेश हुए. उच्चतम न्यायालय ने उन्हें गिरफ्तारी से अस्थायी सुरक्षा दी है.

एक स्थानीय बिल्डर की शिकायत पर अपने और कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली के मामले में सिंह शुक्रवार को ठाणे पुलिस के समक्ष पेश हुए. भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी के खिलाफ महाराष्ट्र में जबरन वसूली के कम से कम पांच मामले दर्ज हैं.

Maharashtra School Reopening: महाराष्ट्र में स्कूल खुलने पर कंफ्यूजन कायम, कैबिनेट बैठक में नहीं हुई चर्चा, स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे का आया बयान

Maharashtra School Reopening: महाराष्ट्र में स्कूल खुलने पर कंफ्यूजन कायम, कैबिनेट बैठक में नहीं हुई चर्चा, स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे का आया बयान

 

कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन (Omicron) के सामने आने से एक बार फिर दुनिया में दहशत का माहौल है. दक्षिण अफ्रीका से आने वाले यात्रियों पर नज़रें रखी जा रही हैं. आने वाले समय में इस वेरिएंट के तेजी से फैलने की शंका जताई जा रही है. इस खतरे को ध्यान में रखते हुए आज (सोमवार, 29 नवंबर) सुबह मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) ने राज्य मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई. इस बैठक में स्कूल शुरू करने को लेकर कोई चर्चा ही नहीं हुई. यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे (Rajesh Tope) ने दी.

ऐसे में राज्य में स्कूल खुलने को लेकर कंफ्यूजन कायम है. बता दें कि 1 दिसंबर से राज्य में पहली क्लास से यानी प्राइमरी स्कूल खोले जाने के फैसले पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को अंतिम मुहर लगानी है. स्कूली शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड ने यह प्रस्ताव दिया था. इस पर स्वास्थ्य विभाग ने अपना ग्रीन सिग्नल दे दिया है. इसी बीच ओमिक्रॉन वेरिएंट के खतरे ने एक कंफ्यूजन पैदा कर दिया है. स्कूल खुलने में अभी दो दिन बाकी हैं. लेकिन आज कैबिनेट बैठक में इस पर कोई चर्चा ही नहीं हुई. इसलिए मुख्यमंत्री द्वारा इस फैसले पर मुहर भी नहीं लगी. ऐसे में स्कूल प्रशासन के लिए तैयारियों को लेकर असमंजसता बरकरार है. बच्चों के अभिभावकों को भी अंतिम फैसले का इंतज़ार है. फिलहाल गेंद स्वास्थ्य विभाग के कोर्ट में है.

स्कूल खोलने पर आखिरी फैसला अब स्वास्थ्य विभाग करेगा

नए वेरिएंट को लेकर आज के मंत्रिमंडलीय बैठक में जो चर्चा हुई उसकी जानकारी देते हुए राजेश टोपे ने कहा कि ज्यादातर चर्चा इन बिंदुओं पर रही कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के खतरे को लेकर राज्य में नए प्रतिबंधों और गाइडलाइंस को लेकर क्या किया जाए? कोरोना काल के प्रतिंबधों के बाद अर्थव्यवस्था काफी मुश्किल से पटरी पर आई है. ऐसे में अगर फिर प्रतिबंध लगाए गए तो अर्थव्यवस्था बैठ जाने के कगार पर भी आ सकती है. ऐसे में ज्यादातर मंत्रियों का सुझाव यह था कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले चर्चा करें, उसके बाद नई गाइडलाइंस तैयार की जाए.

स्कूल खोले जाने पर नियमों का पालन करवाना आसान नहीं

राजेश टोपे ने आगे कहा कि  इस बैठक में स्कूल शुरू करने पर चर्चा ही नहीं हुई. इस बारे में अब निर्णय स्वास्थ्य विभाग करेगा. स्कूल शुरू करने से पहले कई तैयारियां करनी होंगी. कोरोना के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा. सोशल डिस्टेंसिंग रखनी होगी. एक दूसरे से छह फुट का अतंर रखना होगा. मास्क लगाना जरूरी होगा. विद्यालय परिसर में कहीं भीड़ जमा ना हो, इसकी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन को उठानी होगी. स्कूल में अच्छी तरह से सेनिटाइजेशन की व्यवस्था करनी होगी. अगर कुछ विद्यार्थी स्कूल नहीं आ पा रहे हैं तो उनके लिए ऑनलाइन क्लासेस की व्यवस्था करनी होगी.

लेकिन दिक्कत यह है कि व्यावहारिक तौर पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाना आसान नहीं है. कुछ विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बहुत ज्यादा है और स्कूल परिसर छोटा है. इन सब बातों का विचार करते हुए कई स्कूलों ने एक दिसंबर से स्कूल खोलने की तैयारी शुरू ही नहीं की है. इस बीच ओमिक्रॉन वेरिएंट के खतरे ने अभिभावकों के मन में भी शंकाएं पैदा कर दी हैं. ऐसे में अगले दो दिनों में राज्य सरकार क्या फैसले लेती है, इस पर सबकी नजरें होंगी.


बिटकॉइन को करंसी का दर्जा नहीं देगी सरकार, जानिए संसद में सरकार ने क्या कहा

बिटकॉइन को करंसी का दर्जा नहीं देगी सरकार, जानिए संसद में सरकार ने क्या कहा

 

  • बिटकॉइन को करंसी का दर्जा नहीं देगी सरकार, जानिए संसद में सरकार ने क्या कहा
बिटकॉइन को करंसी का दर्जा नहीं देगी सरकार

संसद का शीत सत्र शुरू हो गया है. किसानों के मुद्दे के अलावा कई और मसले हैं जिन पर चर्चा होनी है. इसी में एक अहम मुद्दा क्रिप्टोकरंसी का है. लोग जानना चाहते हैं कि सरकार का आखिर बिटकॉइन, इथर या डोजकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी (Cryptocurrency) को लेकर क्या विचार है. इस बारे में वित्त मंत्रालय ने सोमवार को एक लिखित जवाब में स्पष्ट कर दिया कि देश में बिटकॉइन को करंसी का दर्जा देने का कोई प्रस्ताव नहीं है. सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि वह बिटकॉइन के ट्रांजेक्शन के आंकड़े नहीं रखती.

सोमवार को दो सांसद सुमालता अंबरीश और डीके सुरेश ने केंद्रीय वित्त मंत्री से क्रिप्टोकरंसी को लेकर सवाल पूछा. दोनों सांसद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से जानना चाह रहे थे कि क्या सरकार के पास बिटकॉइन के ट्रांजेक्शन से जुड़ी कोई जानकारी है या सरकार को ये बात जानकारी में है कि भारत में चुपके से बिटकॉइन का ट्रांजेक्शन कितनी तेजी से बढ़ रहा है.

सांसदों ने क्या पूछा सवाल

अगला सवाल यह पूछा गया कि क्या सरकार की ऐसी कोई योजना है जिसमें देश में बिटकॉइन को करंसी की पहचान या दर्जा देने की तैयारी है. इसी के साथ सांसदों ने केंद्रीय मंत्री से कहा कि अगर बिटकॉइन को लेकर ऐसी कोई जानकारी है तो उसे संसद के पटल पर रखा जाए. सरकार इन सवालों के जवाब लिखित में दिए जिसे संसद पटल पर रखा गया.

बिटकॉइन एक डिजिटल करंसी है जो लोगों को सामान और सेवा दोनों की खरीदारी की सुविधा देती है. रुपये-पैसे का भी एक्सचेंज होता है जिसमें किसी बैंक के शामिल होने की जरूरत नहीं. यानी, बिटकॉइन से ट्रांजेक्शन करने या खरीदारी करने के लिए किसी बैंक में खाता होना जरूरी नहीं. इसमें किसी डेबिट, क्रेडिट कार्ड या अन्य थर्ड पार्टी की भी जरूरत नहीं होती.

क्या है सरकार की तैयारी

बिटकॉइन को 2008 में प्रोग्रामरों के एक अज्ञात समूह ने एक वर्चुअल करंसी के साथ-साथ एक इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट सिस्टम के रूप में पेश किया था. यह कथित तौर पर पहली डी-सेंट्रलाइज्ड डिजिटल करंसी है जहां पीयर-टू-पीयर लेनदेन बिना किसी मध्यस्थ के होते हैं.

इस बीच, सरकार की योजना संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र में आधिकारिक डिजिटल मुद्रा विधेयक 2021 पेश करने की है. यह बिल क्रिप्टोकरंसी के रेगुलेशन से जुड़ा है. बिल में डिजिटल करंसी से जुड़ी टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए कुछ निजी क्रिप्टोकरंसी को छोड़कर सभी पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया है, जबकि आरबीआई द्वारा आधिकारिक डिजिटल करंसी की अनुमति दी गई है.

रिजर्व बैंक पूर्व में क्रिप्टोकरंसी पर अपनी असहमति जाहिर कर चुका है. उसका मानना है कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ सकता है. माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक ने इसे पूरी तरह प्रतिबंधित करने की इच्छा जताई थी लेकिन वित्तीय मामलों की स्टैंडिंग कमेटी इसके पक्ष में नहीं है. समिति चाहती है कि एक बीच का रास्ता निकाला जाए ताकि लाखों निवेशकों का हित सध जाए जिन्होंने करोड़ों रुपये बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरंसी में लगाया है. कहा जा रहा है कि सरकार बिटकॉइन को सोने-चांदी, शेयर या बॉन्ड की तरह फाइनेंशियल एसेट का दर्जा दे सकती है जिससे निवेशक ट्रेडिंग करने में सक्षम होंगे. इसकी निगरानी सेबी के पास जा सकती है.